14 सितंबर का दिवस ‘एस एस डब्लू एस’ के प्रांगण में उत्साह और नई चेतना लेकर आया। वह दिन था हिंदी भाषा दिवस। हालाँकि, इस दिवस का प्रारंभ लगभग सात दिवस पहले ही, ‘हिंदी सप्ताह’ के तौर पर हो चुका था। इस सप्ताह के दौरान अलग-अलग प्रतियोगिताओं से लेकर कविता और नाट्य गतिविधियों का आयोजन किया गया। “हिंदी भाषा भारत का अस्तित्व ही नहीं, तो आवाज़ है,” इस आवाज़ को बुलंद करने तथा भाषा की सुरक्षा और संवर्धन हेतु भिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसमें हिंदी भाषा और साहित्य से जुड़े प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता, मुहावरा नाट्य (Role-play) प्रतियोगिता, सामाजिक विषय से जुड़ी चित्र प्रतियोगिता, श्रुतलेखन, कहानी लेखन आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों का बेहतरीन प्रदर्शन रहा।
14 सितंबर के दिन, स्कूल की साप्ताहिक विशेष असेंबली के बाद, ‘एस एस डब्लू एस’ के कला दालान में एक विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई। इस कार्यक्रम में हिंदी को भारत में राजभाषा और संपर्क भाषा के रूप में अपनाने के महत्व को दर्शाया गया। हिंदी का महत्व जानने हेतु कक्षा 8 के छात्रों ने प्रभावशाली भाषण प्रस्तुति दी।
कक्षा तीन से पाँच तक के छात्रों ने अपनी स्वरचित कविताएँ सुनाईं। वहीं, कक्षा चार के छात्रों ने ‘हिंदी भाषा और उसकी बहनें’ नामक नाट्य प्रस्तुति की, जिसका मुख्य उद्देश्य था; समाज में भाषा-भाषा के बीच चल रहे भेदभाव को मिटाया जा सके।
कार्यक्रम का अंतिम दौर एक संगीत गान का था। यह गीत था ‘आरंभ है प्रचंड’, जिसने बच्चों में उत्साह और प्रेरणा भर दी तथा पूरे कार्यक्रम को रोमांचित कर दिया। अंत में, ‘एस एस डब्लू एस’ की प्रधानाचार्य जी और स्नेहा मैडम जी ने हिंदी भाषा का सम्मान करते हुए, हिंदी में ही छात्रों से संवादात्मक रूप में मार्गदर्शन किया।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई। यह दिन ‘एस एस डब्लू एस’ के लिए एक बहुत यादगार लम्हा था।
।।जय हिंद जय भारत।।
